भोपाल। प्रदेश में स्थापित औद्योगिक इकाइयों से मुनाफा कमाने वाले उद्योगों को कार्पोरेट सोशल रेस्पॉसिविलिटी (सीएसआर)फंड को अब मप्र में ही खर्च करना पड़ेगा। इसके लिए राज्य सरकार जल्द ही गाइडलाइन तैयार कर सकती है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर अतिरिक्त आमदनी के सुझाव देने के लिए गठित अफसरों की कमेटी ने यह सुझाव दिया है। मुख्य सचिव एसआर मोहंती की अध्यक्षता में हुई बैठक में अफसरों ने यह बात रखी। जल्द ही रिपोर्ट मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास भेजी जाएगी।
कंपनी एक्ट के तहत उद्योगों को मुनाफे का दो फीसदी हिस्सा (सीएसआर)समाज कल्याण पर खर्च करना ही होता है। खर्च करने के लिए उद्योग स्वतंत्र होते हैं, इसमें सरकार का कोई दखल नहीं होता है। अफसरों ने रिपोर्ट में बताया है कि मप्र में स्थापित ज्यादा उद्योगों के दिल्ली, मुंबई और अन्य बड़े शहरों में कार्पोरेट ऑफिस हैं और वहीं के पते पर पंजीकृत हैं। ऐसे में उद्योग सीएसआर फंड उन्हीं क्षेत्रों में खर्च करते हैं। मप्र में स्थापित इकाइयों से उद्योग जितना मुनाफा कमाते हैं, उसका सीएसआर फंड मप्र में ही अनिवार्य रूप से खर्च करना होगा। इसके लिए राज्य सरकार नियम बना सकती है। हालांकि सीएसआर फंड उद्योग स्वयं खर्च करेंगे, उसमें सरकार का हस्तक्षेप नहीं रहेगा। जिस क्षेत्र में उद्योग स्थापित हैं, वहां शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, स्वच्छता, सड़क, बिजली आदि पर खर्च कर सकते हैं।
मप्र में ही खर्च होगा सीएसआर फंड