भोपाल । निगम परिषद् का कार्यकाल समाप्त हो गया और नेताओं की रवानगी के बाद प्रशासक के रूप में कल्पना श्रीवास्तव ने कुर्सी संभाल ली। अब मार्च के पहले पखवाड़े में ही पंचायत का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। इसको लेकर भोपाल को भी निर्देश मिल गए कि जिले की सभी पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति करने हेतु अधिकारियों की तलाश की जाए। जिला पंचायत सीईओ के पास इसका जिम्मा है और यह तय करना बाकी है कि किस स्तर के अधिकारियों को प्रशासक के रूप में पंचायतों में बैठाया जाए। वहीं एसएलआर या राजस्व निरीक्षकों को भी प्रशासक बनाया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार जिला पंचायत सीईओ को निर्देशित किया गया कि वे उन अधिकारियों को सूची बनाकर भिजवाएं, जिन्हें पंचायतों में प्रशासक नियुक्ति किया जा सके।
उल्लेखनीय है कि 12 मार्च को प्रदेश की 23 हजार 237 पंचायतों (जिला, जनपद और ग्राम पंचायतों )का कार्यकाल 12 मार्च को समाप्त हो रहा है। 13 मार्च को प्रशासकों की नियुक्ति हो जाएगी। फिर प्रशासक चुनाव के पहले जनता के कामकाज करेंगे। इसके बाद चुनाव करवाए जाएंगे। अधिकारियों की मानें तो यह तय नहीं हुआ है कि किस स्तर के अधिकारी इस पद पर बैठाए जाएंगे। वहीं यह भी माना जा रहा है कि राजस्व निरीक्षक या एसएलआर स्तर के जिम्मेदारों को प्रशासक का जिम्मा भी सौंपा जा सकता है, क्योंकि तहसील या जनपद सीईओ के एक-दो पद होने से उन्हें अधिक पंचायतों का जिम्मा दे पाना मुश्किल है। मिले निर्देशों के अनुसार प्रशासक की नियुक्तियों की तैयारियां चल रही हैं।
ग्राम पंचायतों का परिसीमन फिर से करवाना पड़ सकता है। दरअसल, प्रदेश की पूर्ववर्ती शिवराज सरकार ने 30 नई नगर परिषदों का गठन किया था। तकनीकी आधार बनाने के लिए तत्कालीन सरकार ने 22 ग्राम पंचायतों का इनमें विलय किया था। जबकि पंचायत के लोग इसके लिए तैयार नहीं थे। कमलनाथ सरकार के सामने जब यह मामला आया तो सरकार ने इन पंचायतों को नगर परिषद से बाहर कर दिया है। इसलिए चुनाव से पहले ग्राम पंचायतों का परिसीमन फिर से करवाया जा सकता है। ग्राम पंचायतों के प्रभावित होने से जनपद और जिला पंचायतें भी प्रभावित होंगी। इसलिए त्रिस्तरीय पंचायतों के चुनाव करवाने में देरी होने की आशंका जताई जा रही है। उल्लेखनीय है कि पंचायत चुनाव के बाद सरकार अक्टूबर 2020 में नगरीय निकायों के चुनाव करवाने की कोशिश में है।
22 हजार पंचायतों का कार्यकाल 12 मार्च को हो रहा है खत्म